हिमालय पंक्षी
#मातारानी_का_बुलावा_भाग_1
#यादों_में
मातारानी का बुलावा कब आ जाये, कोई नहीं जानता.
हम लोग तो सोचे भी नही थे कि माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए, क्योंकि हमारी यात्रा एक बहुत कठिन एवं दुर्गम थी जो उच्च हिमालय पर थी, देवों के देव महादेव🙏 के तृतीय कैलाश श्रीखण्ड महादेव🙏 जी की.
सितम्बर के प्रथम सप्ताह में हम लोग श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन करने के लिए गए थे, क्योंकि यात्रा बहुत कठिन थी और मौसम अनिश्चित, इसलिए दो अतरिक्त दिन भी लिए थे. लेकिन महादेव🙏 की कृपा से श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन अत्यंत मनोहारी रूप में हुए. दर्शन करने के बाद जब हम नीचे भीमद्वार आकर रूके तो हमारे पास दो अतरिक्त दिन थे, एक बार विचार आया कि मणिमहेश कैलाश भी कर लिया जाए, लेकिन उसके लिए कमसेकम तीन दिन चाहिए थे, लेकिन फिर भी हम तैयार हो गए और रात में सो गए, सुबह उठते ही मैंने कहा कि मणिमहेश कैलाश फिर कभी, चलो मातारानी का दर्शन कर आये.
अपने सहयात्रियों के बारे में बताया ही नही, मेरे साथ गाँव से अंकुर द्विवेदी और रामगुलाब थे. जांव पहुचने पर हम 17 लोग यात्रा पर निकले, जिनमें से 5 लोग वापस आ गए थे और हम 12 लोगों को श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला.
एक टेंट में मै, अंकुर द्विवेदी और रामगुलाब सोये थे. सुबह उठते ही मैंने कहा कि मणिमहेश कैलाश यात्रा फिर कभी, चलते हैं मातारानी के दरबार में, सहमति भी बन गई. अब टिकट करना था जो जांव पहुचने पर ही सम्भव था.
दो दिन बाद जब हम जांव पहुचे तो अंकुर ने चलने से इनकार कर दिया क्योंकि वे एकदम बेहाल हो गए थे, अब इस यात्रा पर सिर्फ दो लोग थे, मै और रामगुलाब. टिकट देखने पर तत्काल में 3 rd AC कन्फर्म मिल गया, रात 10 बजे से चण्डीगढ़ से कटरा ट्रेन थी, जो सुबह 7 बजे कटरा पहुचा देती. उसी दिन दर्शन करके अगले दिन वापसी का टिकट लिये गए.
अगले दिन जांव से सुबह 6 बजे की बस पकड़ कर रामपुर बुशहर, फिर वहाँ से शिमला और शिमला से चण्डीगढ़ रात 8.30 पर पहुँच गए. चण्डीगढ़ स्टेशन पर ही भोजन करके ट्रेन का इंतजार शुरू किया, ट्रेन रात 10.00 बजे आ गई, तो हम अपनी सीटों पर जाकर सो गए.
ट्रेन दौडती रही और हम सोते रहे, जम्मू से आगे निकल जाने पर मेरी नींद खुल गई, ऊधमपुर स्टेशन के आगे निकलते ही रामगुलाब को उठाया और रक्सैक तथा बैकपैक तैयार किया.
कटरा उतरकर हमने आटो लिया और सीधा नेशनल गेस्ट हाउस, कटरा चौक पहुँच कर, एक 500 रुपये में कमरा लिया.
कमरे में पहुँच कर ब्रश, नहाना हुआ. फिर मैंने एक बैग पैक में कैमरा और पानी की बोतल लिया तथा रामगुलाब खाली हाथ ही यात्रा के लिए निकल पड़े. कटरा चौक पर मातारानी को प्रणाम किया और पर्ची काउंटर पर जाकर यात्री पर्ची बनवाया गया.
यात्री पर्ची बनवा कर, सीधे बाणगंगा चेकपोस्ट गए, जहाँ अन्दाजा हो गया कि इसबार भीड भाड मिलेगी. बाणगंगा चेकपोस्ट पार करके हम चलना शुरू किये. मौसम अभी मस्त था पर बादल घिरने लगे थे.
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