अमरनाथ यात्रा भाग 2
#अमरनाथ_यात्रा
पार्ट:- 2
सुबह 3 बजे से तैयारी शुरू हुई पहलगाम जाने की,मन तो नही था क्योंकि साथ के दो लोगों का रजिस्ट्रेशन न था इसलिए उन्हें चंदनवाड़ी चेकपोस्ट से आगे न जाने देंगे और मैं उनको छोड़ कर अकेले जा न सकता था, अंत में सबकुछ महादेव पर छोड़ कर संजय मिश्रा जी पर विश्वास करके,बैग उठाकर चल पड़े। साथ के अन्य लोग भी चल रहे थे और ग्रुप में लगभग 20 लोगों का रजिस्ट्रेशन न था इसलिए सोचते भी थे कि जो होगा देखा जायेगा। जम्मू के चौक पर बस का इंतजार शुरू हुआ,हम लोगों की दो बसें अलग से थी,जो जम्मू बेसकैंप से न जाने वाली थी। लगभग 4.30 बजे सुबह बसें आई और हम-सब अपने अपने बैग उठाकर चल पड़े। बस जैसे ही जम्मू सीमा से बाहर निकल रही थी वैसे ही चेकपोस्ट पर रोक दी गई और कहा गया कि सुबह 6 बजे के पहले आप लोग नहीं जा सकते हैं। फिर बसें वापस आ कर रूक गई और सुबह 6 बजे का इंतजार शुरू हुआ।6 बजे तक बहुत सी गाडियां लाइन में लग गई श्रीनगर और अमरनाथ जाने वालों की। 6 बजे के बाद पुनः यात्रा शुरू हुई और हम सब हर-हर महादेव 🙏 के उद्घोष से मन प्रसन्न करके चल दिए।
बस में राजस्थान का एक ग्रुप था। ब्रजेश भाई भी अपने ग्रुप के साथ थे। बस दामोल के आगे उधमपुर की ओर मुड़ गई, यहाँ से कटरा और श्रीनगर का रास्ता अलग हो जाता है। उधमपुर को हम लोग लगभग 9 बजे पार कर गए और उसके आगे एक भण्डारा पर बस रूक गई। वैसे आपको पूरे रास्ते भण्डारे मिलते रहते हैं।
कुछ लोग खाना खा रहे थे जबकि मैंने कुछ न लिया, वही सफर में न खाने की आदत और कुछ नहीं। एक चाय पी लिया। लगभग 40 मिनट रूकने के बाद बस फिर चल पड़ी। इस बार बस चली तो बनिहाल सुरंग पार कर गई और हम लोग नजारों का आनंद लेते हुए यात्रा कर रहे थे।
जब पहली बार कश्मीर गया था तो जवाहर सुरंग पार करके जम्मू से कश्मीर गया था, लेकिन अब यात्रा पहले से बहुत आसान हो गई है।
बस लगभग 2 बजे काजीगुंड में जाकर रूकी, वहाँ भी छोटे छोटे भण्डारे थे और रेस्टोरेंट भी।
हम लोग भी उतर कर, घूमते रहे। करीब 40 मिनट बाद बस चल पडीं और अनंतनाग से नेशनल हाईवे 44 को छोड़कर पहलगाम की ओर मुड गई।
सडक के साथ साथ लिद्दर नदी बहती है, सेब के बागान और बरसाती नाले तथा नदी का शानदार नजारे दिख रहे थे। सेब खूब थे और हरे- लाल, पीले थे, अभी टूटने में समय था।
लगभग 4 बजे हम लोग पहलगाम पहुँच गए। अपने अपने बैग लेकर चेकपोस्ट पर चेकिंग कराके पार किया। एक सेट टी- शर्ट और ट्रेकिंग पैंट, एक रेनकोट, एक -5°C वाली जैकेट, कुछ बिस्कुट नमकीन आदि एक छोटे बैक पैक में रखकर, शेष सामान बडे़ रक्सेक में रखकर, बस की डिग्गी में रख दिया गया।
अब फिर शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन का खेल, वहाँ शाम तक हलकान होते रहे, लेकिन हाथ कुछ न आया। पहलगाम बेस कैंप में जा न सकते थे, क्योंकि दो लोगों के पास रजिस्ट्रेशन न था। संजय मिश्रा जी के साथ शाम तक इधर उधर हाथ पैर मारने के बाद पता चला कि पहलगाम क्लब हाउस में कल रजिस्ट्रेशन हो सकता है, लेकिन उसके लिए सुबह 5 बजे से लाइन में लगना होगा।
पहलगाम क्लबहाउस के आगे पास में एक कमरा किराए पर लिया और शाम को पहलगाम शिव मंदिर के पास लगे भण्डारे में जाकर, प्रसाद ग्रहण किया।
#पहलगाम
यह एक खूबसूरत हिल स्टेशन है, मैंने इसे ठण्ड और बरसात दोनों मौसम में देखा है। लेकिन बरसात के समय यह गजब का खूबसूरत दिखता है, जन्नत से कम न है पहलगाम, और मेरा सुझाव है आप जब भी पहलगाम घूमने जाइए तो बारिश के समय या बारिश के बाद जाइए। स्वर्ग जैसी अनुभूति होगी। चारों तरफ हरियाली, शानदार बहते बरसाती नाले और लहर कर बहती हुई लिद्दर नदी, गजब का खूबसूरत दृश्य लगता है।
ठण्ड में सब कुछ सूखा सूखा, विरान सा लगता है, केवल बर्फ का साम्राज्य ही दिखाई देता है जो कुछ समय बाद मन भर देता है, लेकिन बारिश के मौसम में आप दिन भर लिद्दर नदी के किनारे बैठे रहिये आप को सम्मोहित किये रहेगी।
रात को हम लोग सुबह 4 बजे उठने का सोचकर सो गए।
क्रमशः........
( रजिस्ट्रेशन से पार पाये किसी तरह तो ऊपर गुफा के पास भूस्खलन से तबाही, जिससे यात्रा रूक गई, अगले भाग में)
हरहर महादेव🙏
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