अमरनाथ यात्रा 3

#अमरनाथ_यात्रा पार्ट:- 3 घर से हम लोग 5 जुलाई 2022 को निकले थे और आज 7 जुलाई को पहलगाम में थे, जहां बिना रजिस्ट्रेशन वाले एक होटल में रूके, वहीं रजिस्ट्रेशन वालों ने पहलगाम बेसकैंप में रूके, जिनमें ब्रजेश पाण्डेय जी, सुनील रूहेला जी, सुनील गुप्ता जी, अंशुमान चक्रपाणि जी भी अपने अपने ग्रुपों के साथ बेसकैंप में रूके हुए थे।जब शाम तक रजिस्ट्रेशन न हो पाया तो तय हुआ कि कल सुबह 5 बजे से क्लब हाउस में जाकर लाइन लगा कर टोकन लिया जायेगा। अन्य लोग जिनका रजिस्ट्रेशन था वे सब कल सुबह से अपनी यात्रा शुरू करेंगे। यहीं पर सचिन सिद्धू जी से भी मुलाकात हुई। मैं भी रूक गया। 08 जुलाई को हम-सब सुबह 4 बजे उठकर,ब्रश करके क्लब हाउस पहुच गये, जहां राम गुलाब और अंकुर जी लाइन में लग गए और मैं संजय मिश्रा जी के अनुसार लगभग भागते हुए पहलगाम चेकपोस्ट तक गया कि वहां अभी तुरंत रजिस्ट्रेशन होने की उम्मीद है, वैसे संजय मिश्रा जी भी वहां तक पहुंचे लेकिन वहां भी कुछ न हुआ। अब बात करते हैं क्लब हाउस रजिस्ट्रेशन के बारे में,मेरा यह कहना है कि बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा पर बिल्कुल मत जाइये, आप के पास यदि रजिस्ट्रेशन नहीं है तो कम-से-कम दो अतरिक्त दिन और बेवजह लाइन में घंटों लगना पड़ेगा। तो हां बात करते हैं क्लब हाउस में रजिस्ट्रेशन का , पहलगाम में क्लब हाउस एकदम लिद्दर नदी के किनारे बहुत बढ़िया लोकेशन पर बना है, जहां बड़ी बड़ी सीमेंट कांक्रीट की नालियों में लगातार पानी बहता रहता है,हम लोगों का बहुत समय क्लब हाउस में और वहीं लिद्दर नदी के किनारे बीता था। क्लब हाउस में प्रतिदिन 60 लोगों का रजिस्ट्रेशन ही होता है, सुबह 10 से टोकन देते हैं, फिर 11 बजे से टोकन नंबर के अनुसार बुलाकर रजिस्ट्रेशन करते हैं और वहीं मेडिकल कैंप लगता है जहां फार्म भरकर आप अपना मेडिकल करवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन होते होते लगभग 1 बज गए।हम लोग कार्ड और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट लेने के बाद शिव मंदिर भण्डारें में जाकर प्रसाद ग्रहण किया और उनके दानपात्र में गुप्त दान भी कर दिया। अब रजिस्ट्रेशन हाथ में था तो तय हुआ कि सुबह से ही यात्रा शुरू करेंगे, और आज शाम तक पहलगाम घूमते हैं। पहलगाम में लगभग 3 बजे से शाम 7 बजे तक घूमते रहे तभी सूचना आई कि ऊपर गुफा पर बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ है और वहां बहुत टेंट बह गये या मलवे में दब गए हैं, जिससे बहुत लोगों के मरने की खबर आने लगी और इसी के साथ यात्रा स्थगित करने वाली न्यूज भी आने लगी, शुभचिंतकों के फोन भी आने शुरू हो गये, आलोक भैया का सबसे पहले फोन आया और उनसे ही जानकारी मिली कि बहुत बड़ी दुर्घटना हुई है। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाने लगा और पहलगाम में सेना लगातार मार्च करने लगी तथा साथ ही साथ यह भी अनाउंसमेंट हुआ कि कल यात्रा स्थगित रहेगी। गुफा की ओर जाने वालों में सचिन सिद्धू पंचतरणी पहुंच गए थे और ग्रुप वाले शेषनाग झील पर रूके थे। फोन पर सबसे बात भी हुई, और ग्रुप में चैट भी। सब लोग सकुशल थे, लेकिन गुफा पर बहुत लोग ऐसे थे जो इतने भाग्यशाली न थे, उनके परिवार वालों के प्रति संवेदना और उन्हें ओम शांति🙏 जब हम हिमालय पर जाते हैं तो लौट कर आ जायें तो ये हनुमान जी की कृपा होती है, वरना हर उच्च हिमालय यात्रा जान जोखिम में डालने के बराबर होती है, महादेव की कृपा से जो लोग बच गये थे उन्हें सेना वाले जान जोखिम में डाल कर नीचे या सुरक्षित जगह तक पहुचा रहे थे। हम लोग भी इकठ्ठा हो कर इस तबाही पर चर्चा कर रहे थे कि इतना खूबसूरत पहाड़, पता नही किस बात पर बिगड़ कर जानलेवा हो जाता है। बारिश के कारण ऊपर रेस्क्यू आपरेशन में भी दिक्कत आ रही थी, इधर बार बार अनाउसमेंट हो रहा था कि जिनके पास अतरिक्त कपड़े हो, वे दान कर दें, ऊपर लोगों के बैग गायब हो गये हैं और पहनने के लिए उनके पास कुछ न है, हमारे बैग बस में बालटाल पहुँच चुके थे वरना अतरिक्त कपड़े हम भी लिए थे। रात यह सोचकर नींद आई कि कल और रूकते हैं यदि यात्रा होती है तो ठीक है। वैसे भी हमारे बैग सबके साथ बालटाल पहुँच गए थे इसलिए वापस भी नही जा सकते थे। रजिस्ट्रेशन होने पर एक बार मन में आया कि चलो बेस कैंप में टेंट लेते हैं, फिर हिसाब किया तो पता चला कि कमरे का रेंट भी 1000 है और वहाँ भी लगभग 750 लग जायेगें, प्रति व्यक्ति 250 के हिसाब से, इसलिए होटल में ही रूकना ठीक समझा। वैसे बेस कैंप के भण्डारें का चाह था लेकिन हमारे कमरे के एक दम सामने लखनऊ वालों का एक भण्डारा आज से पुनः शुरू हो गया था, इसलिए खाने की समस्या भी नही थी। हम लोग रात को 11 बजे तक संजय मिश्रा जी के साथ बातचीत करते रहे और अंत में एक और दिन इंतजार करने का फैसला करके सोने चले गए। क्रमशः...........

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