अमरनाथ यात्रा

#अमरनाथ_यात्रा पार्ट:- 1 वर्ष 2020 में अमरनाथ यात्रा की बड़ी इच्छा जागृति हुई, तो आलोक भैया के लगभग 50 लोगों का ग्रुप तैयार था, उसी में मै भी शामिल हो गया, अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने जैसे ही यात्रा की तिथियाँ और मेडिकल, रजिस्ट्रेशन का नोटिफिकेशन जारी किया तो हम लोग भी जिला अस्पताल पहुचकर अपना मेडिकल करा लिए, और उसके बाद रजिस्ट्रेशन, यह सब अप्रैल के मध्य तक संपन्न हो चुका था, लेकिन तबतक कोरोना भी फैलने लगा था, मई- जून में कोरोना अपने भयावह रुप में था और श्राइन बोर्ड ने अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी। महादेव की इच्छा मानकर, उन्हें प्रणाम करके हम भी शांत बैठ गए, वर्ष 2021 में भी यात्रा स्थगित ही रही। इसी बीच कोरोना पाजिटिव भी हुआ और फिर ठीक भी, लेकिन तब से लेकर आजतक ब्लडप्रेशर अनियंत्रित हो गया, कोरोना ने अपना असर छोड़ दिया है जो अभी भी है। खैर आगे चलते हैं। वर्ष 2020 और 2021 में यात्रा स्थगित रही, लेकिन 2022 में यात्रा होना श्राइन बोर्ड की ओर से निश्चित हुआ, फिर अपने संजय मिश्रा भाई जी के ग्रुप के साथ यात्रा का प्लान बना। हमारी यात्रा जुलाई के प्रथम सप्ताह में होना निश्चित था, उसी के अनुसार मेडिकल- रजिस्ट्रेशन भी हो गया। सब कुछ तय होने पर बेगमपुरा एक्सप्रेस में आने- जाने का टिकट भी बुक करवा लिया। इस यात्रा में घुमक्कड़ लोगों का जमावड़ा लगना था, इससे बहुत उत्साहित भी था कि जिन लोगों से अभी आभासी मुलाकात होती है, उनसे मिलना भी हो जायेगा। जैसे- जैसे यात्रा की तारीख नजदीक आती जा रही थी, वैसे वैसे तैयारियां भी होने लगी, वैसे तो मेरे पास हिमालय सहित अन्य यात्राओं के लिए लगभग 5000- 5500 मीटर ऊचाई तक के ट्रेक के लिए जरूरत से ज्यादा ट्रेकिंग गेयर्स हैं, इसलिए कुछ नया खरीददारी करने के लिए सोचना भी नहीं था। जुलाई में यात्रा थी और मै अपने यहाँ से अकेले ही था, जून के मध्य में राम गुलाब भाई भी तैयार हो गये, मैंने कहा चलो ठीक है। संजय मिश्रा जी से बात किया तो उन्होंने कहा कि मेडिकल रजिस्ट्रेशन जम्मू पहुचकर हो जायेगा, यात्रा नजदीक आते ही अंकुर भाई भी तैयार हो गये, अब हम तीन लोग साथ थे। लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए, क्योंकि दो वर्ष बाद यात्रा शुरू होने के कारण भीड़ खूब थी। महादेव की इच्छा मानकर चलने की तैयारी होने लगी, आने जाने का टिकट नहीं था और वेटिंग बहुत ज्यादा थी, जिसे कंफर्म होने का 10% भी चांस नही था। हमने तय किया कि तत्काल टिकट लिया जायेगा। यात्रा के एक दिन पहले तत्काल बुकिंग भी न हो पाई, क्योंकि भारत में तत्काल बुकिंग एवरेस्ट चढने से कम न है और हम लोग भ्रष्ट सिस्टम के आगे हारकर, एवरेस्ट यात्रा स्थगित कर दिए। अब समस्या बनी कि जाया कैसे जाये, टिकट केवल मेरा कंफर्म था तो मैंने कहा कि चलिए एक ही टिकट है, दो जनरल टिकट ले लेना और टी सी महोदय आयेगें तो फाइन भर दिया जायेगा। एक रात की बात है बैठ कर चलेगें, सोयेंगे नही। यात्रा के दिन सुलतानपुर रेलवे स्टेशन पहुचकर दो जनरल टिकट ले लिया गया और फिर शुरू हुआ ट्रेन का इंतजार। भारत में ट्रेन यदि अपने समय पर आ जाये तो यह भी हिमालय पार करने से बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, खैर ट्रेन को इस गौरव को हासिल करने में न तो दिलचस्पी थी और न ही जरूरत , इसलिए वह अपने समय पर आई ही नहीं, लगभग घंटे भर देर से आने पर मन को असीम सुख प्रदान किया। ट्रेन आई तब पता चला कि यह स्लीपर दिखाई पडने वाला डिब्बा मिडिल क्लास समाज जैसा है जो हर तरफ से बेचारा पिसता रहता है और जिम्मेदारी के बोझों तले दबा रहता है। डिब्बे की दयनीय दशा को देखते हुए डिब्बे में किसी तरह से प्रवेश किया, मैं जब भी अकेले सफर करता हूँ तो अपर बर्थ ही चुनता हूँ, मेरी साइड अपर बर्थ थी। नीचे बर्थ के साथ वाले यात्री भी अमरनाथ यात्रा पर थे ,बनारस के पंडित जी। लेकिन उनके साथ भी एक वेटिंग वाले थे। मिथुन की हिरोइन जैसे डिब्बे की हालत थी, हर बलशाली उसे अपने हिसाब से भोगना चाहता हो, नियम कानून हम जैसे बेचारों के लिए होता है। ऊपर बैठे हुए लोगों से अपनी बर्थ हासिल करके राम गुलाब भाई और अंकुर भाई वहाँ कब्जा कर लिए और हम पंडित जी के साथ हो लिए कि रात्रि 9 बजे तक बैठने के लिए मेरा भी अधिकार है और हम आप अमरनाथ यात्रा पर हैं तो भोले होने के नाते भाई हैं, अत: पंडित जी,भोले का नाम सुनकर तुरंत जगह बना दी, फिर क्या था बैठ गए। ट्रेन गति पकडती गई और ट्रेन में भीड़ का शोर धीरे धीरे कम होता गया। लखनऊ पहुँच कर ब्रजेश पाण्डेय जी का फोन आया ब्रजेश पाण्डेय जी भी इसी ट्रेन में थे,तो मैं उनसे मिलने चला गया, ब्रजेश पाण्डेय जी से पहली मुलाकात हुई, फिर अब तो साथ ही यात्रा करनी है, अंशुमान भाई जी इसी ट्रेन में थे यह बात जम्मू पहुँच कर पता चली, और सभी लोग अपने साथ 5-7 लोगों के

Comments

Popular posts from this blog

केदारनाथ पंच केदार की सम्पूर्ण जानकारी

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा भाग 4