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केदारनाथ पंच केदार की सम्पूर्ण जानकारी

पंच केदार जब केदार की बात की जाती है तो अधिकांश लोग सिर्फ केदारनाथ के बारे में जानते हैं, कथाओं के आधार पर केदारनाथ, महादेव का सिर्फ एक भाग है, बाकी के अन्य अंग का प्रादुर्भाव अन्य स्थानों पर हुआ है. इन सबको मिला कर पंच केदार की अवधारणा है, जिसमें प्रथम केदार हैं - केदारनाथ, द्वितीय केदार- मध्य महेश्वर, तृतीय केदार- तुंगनाथ, चतुर्थ केदार- रूद्र नाथ और पंचम केदार- कल्पेश्वर महादेव. सभी केदार उत्तराखण्ड राज्य में हिमालय की वादियों में स्थित हैं. प्रथम केदार:- #केदारनाथ हिमालय की वादियों स्थित प्रथम केदार 12 ज्योर्तिलिंगों में भी आते हैं, यहाँ की स्थिति ऐसी है कि आपको स्वर्ग की अनुभूति होगी. लगभग 18 किलोमीटर का खूबसूरत और कठिन चढाई वाला मार्ग है, लेकिन रास्ते की सुंदरता आपको मोहित करती रहेगी. खाने पीने और रहने की कोई दिक्कत नहीं है, बस छुट्टियों में इस यात्रा को करने से बचिए. अधिक भीड़ होने पर दिक्कत आती है और खर्च भी बढ़ जाता है,यदि आप स्वस्थ हैं तो पैदल ही इस यात्रा को करिये. खर्च:- 1500-2000 (सोनप्रयाग से सोनप्रयाग) और समय :- 2 दिन द्वितीय केदार:- #मध्य_महेश्वर- इसमें भी यदि सुबह यात्...

माता वैष्णो देवी की यात्रा.

#मातारानी_का_बुलावा_भाग_1 #यादों_में मातारानी का बुलावा कब आ जाये, कोई नहीं जानता. हम लोग तो सोचे भी नही थे कि माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए, क्योंकि हमारी यात्रा एक बहुत कठिन एवं दुर्गम थी जो उच्च हिमालय पर थी, देवों के देव महादेव🙏 के तृतीय कैलाश श्रीखण्ड महादेव🙏 जी की. सितम्बर के प्रथम सप्ताह में हम लोग श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन करने के लिए गए थे, क्योंकि यात्रा बहुत कठिन थी और मौसम अनिश्चित, इसलिए दो अतरिक्त दिन भी लिए थे. लेकिन महादेव🙏 की कृपा से श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन अत्यंत मनोहारी रूप में हुए. दर्शन करने के बाद जब हम नीचे भीमद्वार आकर रूके तो हमारे पास दो अतरिक्त दिन थे, एक बार विचार आया कि मणिमहेश कैलाश भी कर लिया जाए, लेकिन उसके लिए कमसेकम तीन दिन चाहिए थे, लेकिन फिर भी हम तैयार हो गए और रात में सो गए, सुबह उठते ही मैंने कहा कि मणिमहेश कैलाश फिर कभी, चलो मातारानी का दर्शन कर आये. अपने सहयात्रियों के बारे में बताया ही नही, मेरे साथ गाँव से अंकुर द्विवेदी और रामगुलाब थे. जांव पहुचने पर हम 17 लोग यात्रा पर निकले, जिनमें से 5 लोग वापस आ गए थे और हम 12 लोगों को श्रीखण...

हिमालय पंक्षी

#मातारानी_का_बुलावा_भाग_1 #यादों_में मातारानी का बुलावा कब आ जाये, कोई नहीं जानता. हम लोग तो सोचे भी नही थे कि माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए, क्योंकि हमारी यात्रा एक बहुत कठिन एवं दुर्गम थी जो उच्च हिमालय पर थी, देवों के देव महादेव🙏 के तृतीय कैलाश श्रीखण्ड महादेव🙏 जी की. सितम्बर के प्रथम सप्ताह में हम लोग श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन करने के लिए गए थे, क्योंकि यात्रा बहुत कठिन थी और मौसम अनिश्चित, इसलिए दो अतरिक्त दिन भी लिए थे. लेकिन महादेव🙏 की कृपा से श्रीखण्ड महादेव🙏 के दर्शन अत्यंत मनोहारी रूप में हुए. दर्शन करने के बाद जब हम नीचे भीमद्वार आकर रूके तो हमारे पास दो अतरिक्त दिन थे, एक बार विचार आया कि मणिमहेश कैलाश भी कर लिया जाए, लेकिन उसके लिए कमसेकम तीन दिन चाहिए थे, लेकिन फिर भी हम तैयार हो गए और रात में सो गए, सुबह उठते ही मैंने कहा कि मणिमहेश कैलाश फिर कभी, चलो मातारानी का दर्शन कर आये. अपने सहयात्रियों के बारे में बताया ही नही, मेरे साथ गाँव से अंकुर द्विवेदी और रामगुलाब थे. जांव पहुचने पर हम 17 लोग यात्रा पर निकले, जिनमें से 5 लोग वापस आ गए थे और हम 12 लोगों को श्रीखण...